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13 November 2010

वक़्त का पहिया

(चित्र साभार:गूगल इमेज सर्च)



बड़ा अजीब होता है
ये वक़्त का पहिया
हर दम चलता रहता है
बिना रुके
साँसों के संग

क्या क्या देखता है
क्या क्या दिखाता है
जीवन के अनगिनत
कुछ सदृश
कुछ
अदृश्य रंग.

कभी खेलता है
खुशियों की होली
कभी गम की बारिश में
भीगता है
भिगाता है

बिना रुके हरदम
वक़्त का पहिया
चलता  जाता है.





(मैं मुस्कुरा रहा हूँ..)

12 comments:

  1. वक्त हमेशा आगे रहता है ...अनवरत चलता जाता है ..

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  2. सही लिखा है भैया ....बढ़िया रचना है.पसंद आई.

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  3. यशवन्त भाई,
    कैसे लिख जाते हो यार ऐसा सब........

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  4. चलता भी रहना चाहिए ... :).. ये ही जीवन है... बहुत सुंदर रचना ....

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  5. anwarat chalaymaan waqt ke pahiyon par sundar bhaav udela hai!
    shubhkamnayen!

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  6. आपने तो सटीक काव्यमय परिभ्हाषा गढ दी।

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  7. जीवन के हर हाल में गतिमान और गतिशील रहने की अकाट्य सच्चाईयों को वक्त के पहिए के बिब के द्वारा बखूबी उभारा गया है. सटीक और खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार
    सादर,
    डोरोथी.

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  8. कभी खेलता है
    खुशियों की होली
    कभी गम की बारिश में
    भीगता है
    भिगाता है

    बिना रुके हरदम
    वक़्त का पहिया
    चलता जाता है....वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

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  9. यह तो बहुत सुन्दर कविता है...बधाई.

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  10. आदरणीया संगीता जी,वीरेंद्र जी,संजय जी,क्षितिजा जी,अनुपमा जी,मनोज जी डोरोथी जी,दिव्या जी,रानी जी और डियर पाखी-आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

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  11. वक्त किसीके लिए नहीं रुकता है ... सुन्दर प्रस्तुति !

    बाल दिवस की शुभकामनायें !

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