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01 December 2014

चलना है यूं ही चलना है....

कभी कदमों को
यूं ही थाम कर
कभी भविष्य को
थोड़ा भाँप कर
मुड़ कर पीछे
राह नाप कर
चलना है
यूं ही चलना है....

मन की अपनी
सब से कह कर 
सब की कुछ
अनकही को सुन कर
जीवन चक्र की
धुरी पर चल कर
बढ़ना है
यूं ही बढ़ना है ......

वक़्त कम
इन चौराहों पर
खुले आसमां की
निगाहों पर
खुद के अक्स को
गले लगा कर
मिलना है
कभी बिछड़ना है .....

चलना है
यूं ही चलना है.... ।

 ~यशवन्त यश©
owo30112014  

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. बहुत सुंदर भाव...चलना है और चलते ही जाना है..गति ही जीवन है

    ReplyDelete

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