प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

23 August 2020

आज की शाम (2 शब्द 3 चित्र)


हम सिर्फ सोचते रह जाते हैं
ख्यालों के बादल
आ कर चले जाते हैं

Shot by Samsung M30s-Copyright-Yashwant Mathur©
 मैं चाहता हूँ
बरस जाएं लेकिन
थोड़ा गरज कर ही
मंजिल पा जाते हैं

Shot by Samsung M30s-Copyright-Yashwant Mathur©
 ये आज की शाम है
मगर किस्सा हर रोज का है
कुछ शब्द लिखते हैं 
कुछ मिटा दिये जाते हैं। 

Shot by Samsung M30s-Copyright-Yashwant Mathur©

-यशवन्त माथुर ©
23082020 



6 comments:

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

  1. एक न एक दिन बरसेंगे बादल, बस भरोसा चाहिए

    ReplyDelete
  2. सुन्दर और सारगर्भित प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  4. बिल्कुल ऐसा ही होता है..
    कुछ अधूरा सा गुजर जाता है..
    कुछ पूरा सा रह जाता है गुजरने को..
    बीत जाती है हर शाम छोड़कर कुछ ना कुछ करने को..

    ReplyDelete