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23 August 2020

आज की शाम (2 शब्द 3 चित्र)


हम सिर्फ सोचते रह जाते हैं
ख्यालों के बादल
आ कर चले जाते हैं

Shot by Samsung M30s-Copyright-Yashwant Mathur©
 मैं चाहता हूँ
बरस जाएं लेकिन
थोड़ा गरज कर ही
मंजिल पा जाते हैं

Shot by Samsung M30s-Copyright-Yashwant Mathur©
 ये आज की शाम है
मगर किस्सा हर रोज का है
कुछ शब्द लिखते हैं 
कुछ मिटा दिये जाते हैं। 

Shot by Samsung M30s-Copyright-Yashwant Mathur©

-यशवन्त माथुर ©
23082020 



6 comments:

  1. एक न एक दिन बरसेंगे बादल, बस भरोसा चाहिए

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  2. सुन्दर और सारगर्भित प्रस्तुति।

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  3. बहुत सुन्दर

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  4. बिल्कुल ऐसा ही होता है..
    कुछ अधूरा सा गुजर जाता है..
    कुछ पूरा सा रह जाता है गुजरने को..
    बीत जाती है हर शाम छोड़कर कुछ ना कुछ करने को..

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