प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

14 February 2021

क्या होता है प्रेम ?

वो 
जो निर्दयी समाज के ताने-बाने में 
बुरी तरह फँसकर 
पंचायतों के चक्रव्यूहों में उलझ कर 
बलि चढ़ जाता है 
खोखले उसूलों की 
तलवारों से कट कर.... ?

या वो 
जिसे तमाम अग्नि परीक्षाओं से 
गुज़ारकर भी 
ठुकरा दिया जाता है 
एकतरफा करार दे कर 
मजबूर किया जाता है 
एकाकी हो जाने को....?

या फिर वो 
जिसे 'खास' चश्मे से देखकर 
हम सब उतार देते हैं 
अपनी गोरी-काली 
और मोटी-पतली नज़रों से... ?

प्रश्न 
यूं तो बहुत से हैं 
लेकिन सार सबका सिर्फ यही 
कि आखिर क्या होता है प्रेम....?

-यशवन्त माथुर ©
08022021

20 comments:

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

  1. वाकई कविता में उठाया गया प्रश्न सदियों से अनुत्तरित है, जो उत्तर जानने की जिज्ञासा में अनेक बार भटका है। कृष्ण और मीरा के प्रेम जैसा पावन प्रेम बिरले ही मिल पाता है। इस अच्छी कविता के लिए बधाई 🙏

    कृपया यहां भी पधारें... दस दोहे वसंत पर

    ReplyDelete
  2. अनजाना सा आकर्षण है प्रेम जिसमें हुआ जा सकता है पर समझा नहीं जा सकता है । अति सुन्दर कथ्य ।

    ReplyDelete
  3. प्रश्न उठाती और प्रश्न छोड़ कर जाती हुई आपकी रचना बेहतरीन है..
    सादर प्रणाम

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  5. प्रणय दिवस के अवसर पर सार्थक प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  6. आज के प्रेम परिदृष्य पर गूढ़ प्रश्न उठाती समसामयिक यथार्थ पूर्ण रचना..

    ReplyDelete
  7. गहरे प्रश्न उठाती रचना.. वास्तविक प्रेम को कोई बिरला ही जान पाता है

    ReplyDelete
  8. सवाल बहुत हैं यशवंत जी । लेकिन जवाब प्यार करने वालों को ही ढूंढ़ने होंगे क्योंकि दर्द भी वही झेलते हैं और ज़ुल्म भी वही । उन्हीं पर बीतती है, इसलिए अपना हाले दिल वे ही बेहतर जानते हैं । दूसरे उसे क्या जानें, क्यों जानें ? बाकी प्रेम क्या है, यह या तो प्रेम करने से लगता है या किसी का प्रेम पाने से । बहुत अच्छी और सही अभिव्यक्ति है आपकी ।

    ReplyDelete
  9. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  10. प्रश्न
    यूं तो बहुत से हैं
    लेकिन सार सबका सिर्फ यही
    कि आखिर क्या होता है प्रेम....?
    बहुत सटीक सवाल। जिसका जबाब देना आसान नही है। क्योंकि वो महसूस करने की बात है।

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!