प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

28 June 2011

वक़्त

आज फिर
'वक़्त'
मिल गया मुझ को
वो
दौड़ता हुआ
जा रहा था कहीं

कहने लगा-
तुम भी दौड़ो मेरे संग
मैं  भी दौड़ने लगा
उसका आमंत्रण  पाकर
बातें करने लगा उससे
कुछ अपनी कहता
कुछ उसकी सुनता
मैं  उसके संग
चलता जा रहा था

पर एक क्षण
मैं दौड़ते दौड़ते
खुद को संभाल न सका
मैं थक कर
हांफ हांफ कर
रुक गया
वक्त से भी कहा-
आओ तुम भी सुस्ता लो
फिर चलेंगे

वक़्त बोला -
मेरे पास
रुकने का वक़्त नहीं है
वक़्त बहुत कम है
मुझे जाना है
वो  चलता चला गया
अपनी राह

मैं देखता रह गया
और वो
बिना थके
दौड़ता जा रहा था
चलता  जा रहा था
उसी ऊर्जा से
उसी वेग से

वो हो गया था
मेरी आँखों से ओझल
वो  निकल चुका था
एक लंबे सफर पर
और मुझे
फिर शुरू करना था
दौड़ना

विश्राम से उठने  के बाद
मैं वहीँ था
जहाँ वक़्त ने मुझे छोड़ा था
और वो 'वक़्त'
तय कर रहा था
नए रास्तों को
पल  पल बीतते
वक़्त के साथ.
------------------------
[इस कविता का ऑडियो आप यहाँ सुन सकते हैं]

36 comments:

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

  1. मैं देखता रह गया
    और वो
    बिना थके
    दौड़ता जा रहा था
    चलता जा रहा था
    उसी ऊर्जा से
    उसी वेग से

    वक्‍त यूं ही हमेशा दौड़ता रहता है ...बेहतरीन ।

    ReplyDelete
  2. वक्त हर पल चलता रहता है ...हम ही रुक जाते हैं ...

    ReplyDelete
  3. वक़्त बोला -
    मेरे पास
    रुकने का वक़्त नहीं है
    वक़्त बहुत कम है
    मुझे जाना है
    वो चलता चला गया
    अपनी राह......बहुत सुन्दर ...सुन्दर अभिव्यक्ति सहज शब्दों में व्यक्त करने की खूबी सच, आप में है .....

    ReplyDelete
  4. विश्राम से उठने के बाद
    मैं वहीँ था
    जहाँ वक़्त ने मुझे छोड़ा था
    और वो 'वक़्त'
    तय कर रहा था
    नए रास्तों को
    पल पल बीतते
    वक़्त के साथ.
    bahut sunder ....
    vakt ke sath chalana kathin to hai hi ...

    ReplyDelete
  5. आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

    ReplyDelete
  6. विश्राम से उठने के बाद
    मैं वहीँ था
    जहाँ वक़्त ने मुझे छोड़ा था
    और वो 'वक़्त'
    तय कर रहा था
    नए रास्तों को
    पल पल बीतते
    वक़्त के साथ.


    वक़्त को बड़ी बारीकी से व्याख्यायित किया है आपने।

    ReplyDelete
  7. वक्त के साथ दौड़ना जोखिम भरा काम है...बहुत सुन्दर रचना...बधाई

    नीरज

    ReplyDelete
  8. बहुत ख़ूबसूरत..कितना मुश्किल होता है वक़्त के साथ चलना..

    ReplyDelete
  9. कविता थोड़ी लम्बी है, लेकिन वक्त को बाँधने का प्रयास खूबसूरत है , अंदाज़ अच्छा है बधाई यशवंत जी

    ReplyDelete
  10. विश्राम से उठने के बाद
    मैं वहीँ था
    जहाँ वक़्त ने मुझे छोड़ा था
    और वो 'वक़्त'
    तय कर रहा था
    नए रास्तों को
    पल पल बीतते
    वक़्त के साथ.
    सही कहा यशवंत जी वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता वह तो अपना रास्ता पार करता ही रहता है.बहुत सुन्दर व् सजग भावाभिव्यक्ति.बधाई.

    ReplyDelete
  11. time is precious
    no doubt

    bt ur creation on time
    is priceless

    awesome read

    Thank u for d invitation
    Naaz

    ReplyDelete
  12. vakt ko baandhane kaa khoobasoorat andaaj...bahut badhiya post/kavita.

    ReplyDelete
  13. bilkul sahi bat hai waqt kabhi rukta nahi hai kisi ke liye...
    bahut achhi rachna

    ReplyDelete
  14. वक्त को कौन रोक पाया है... हाँ, खुशी में कहते हैं वक्त ठहर जाता है..सुंदर कविता !

    ReplyDelete
  15. शायद यही वक़्त की ख़ूबसूरती है ...... शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  16. वक़्त हमेशा आगे की ओर ही भागता है और हम कहीं न कही रुकते ही हैं .सार्थक व् सुन्दर भावाभिव्यक्ति .आभार

    ReplyDelete
  17. सच है वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता .. कुछ समय तक साथ देता है फिर निकल जाता है ... थका हरा छोड़ कर ... लाजवाब रचना है ..

    ReplyDelete
  18. वक़्त बोला -
    मेरे पास
    रुकने का वक़्त नहीं है
    वक़्त बहुत कम है
    मुझे जाना है
    वो चलता चला गया
    अपनी राह......
    बहुत सुन्दर रचना...सुन्दर अभिव्यक्ति......

    ReplyDelete
  19. माथुर जी!

    समयचक्र ऐसा है ही बिना रुके, बिना थके सतत् चलता रहता है। और जीवन में अनेक बार हम उससे कदम मिलाकर चलने का प्रयास करते हैं पर वह हमें पीछे छोड़ आगे बढ़ जाता है। इस शाश्वत सत्य को व्यक्त करती हुई व्यथा-कथा -हर एक की अवस्था को रेखांकित करती हुई एक सुन्दर और मर्मस्पर्शी कविता रची है आपने ...................अच्छी लगी.................प्रभावशाली भी

    ReplyDelete
  20. वो हो गया था
    मेरी आँखों से ओझल
    वो निकल चुका था
    एक लंबे सफर पर
    और मुझे
    फिर शुरू करना था
    दौड़ना

    विश्राम से उठने के बाद
    मैं वहीँ था
    जहाँ वक़्त ने मुझे छोड़ा था



    ये पंक्तियाँ विशेषकर अच्छी लगी।....................


    सराहनीय

    ReplyDelete
  21. हाँ वक्त ही करता सवारी आदमी की साक्षी भाव लिए हम सब कुछ देखते रहतें हैं .अच्छी रचना .कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे .

    ReplyDelete
  22. " विश्राम से उठने के बाद
    मैं वहीँ था
    जहाँ वक़्त ने मुझे छोड़ा था
    और वो 'वक़्त'
    तय कर रहा था
    नए रास्तों को
    पल पल बीतते
    वक़्त के साथ...."
    बेहद छु लेने वही पंक्तियाँ हैं ......
    बच्क्ग्रौंद म्यूजिक भी suport कर रह ह आपकी इस रचना को .....
    बहुत बहुत शुभ-कामनाएं !!!

    ReplyDelete
  23. जीवन्त विचारों की बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !

    ReplyDelete
  24. विश्राम से उठने के बाद
    मैं वहीँ था
    जहाँ वक़्त ने मुझे छोड़ा था
    और वो 'वक़्त'
    तय कर रहा था
    नए रास्तों को
    पल पल बीतते
    वक़्त के साथ.

    बहुत बढ़िया ....सुंदर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  25. वक़्त के गुलाम हैं सभी ,दौड़ना पड़ता है.बहुत खूब

    ReplyDelete
  26. सुंदर अभिव्यक्ति....

    ReplyDelete
  27. वक्त के साथ चलना चाहिए , दौड़ना हानी कारक है

    ReplyDelete
  28. इस वक़्त को भी क्या कहें, थम सा गया है आज कल|
    और भागता ही जा रहा है, बेवजह हर आदमी||

    ReplyDelete
  29. हम तो कहते थे हमारे पास वक़्त नही है
    यहाँ आये तो मालूम हुआ
    वक़्त को भी आस है वक़्त की

    ReplyDelete
  30. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

    ReplyDelete
  31. sundar rachna ke liye badhaai sawikar karein..
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!