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17 March 2012

बदलाव

कितनी जल्दी
बदल जाते हैं दिन
कितनी जल्दी
बदल जाते हैं सपने
अपेक्षाएँ ,कसमें ,वादे
चित्र भी, चरित्र भी
कभी ये मजबूरी होती है
और कभी छलावा
चेहरे के भीतर के
चेहरे का दिखावा

सूरज उगता है
दिन चढ़ता है
और ढलने के समय
रंग बदलता है 
गहरी रात और फिर
बदलते रंग की तरह
श्वेत सुबह

चक्र तो प्रकृतिक ही है
फिर इस बदलाव से
मैं क्यों परेशान ?
क्यों हूँ हैरान ?

सिर्फ इसलिये कि
चुकानी पड़ती है
कुछ तो कीमत
जज्बाती होने की ।

36 comments:

  1. कभी ये मजबूरी होती है
    और कभी छलावा
    चेहरे के भीतर के
    चेहरे का दिखावा...
    बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन सटीक रचना,......

    MY RESENT POST... फुहार....: रिश्वत लिए वगैर....

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  2. बहुत सुन्दर....
    सच है जज्बाती होना खुद के लिए भारी पड़ता है अकसर....

    भावपूर्ण लेखन.
    सस्नेह.

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  3. यूँ तो बदलाव जरूरी है , या जीवन चक्र की मजबूरी है , कभी ये खुशियां दे जाता, कभी ले आता कुछ दूरी है ...........

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  4. जज़्बात तो रहेंगे लेकिन अति जज़्बाती होने की कीमत अदा करनी पड़ती है. सुंदर रचना.

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  5. ...सिर्फ इसलिये कि
    चुकानी पड़ती है
    कुछ तो कीमत
    जज्बाती होने की ।

    सुन्दर अभिव्यक्ति,
    सादर

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  6. jajbati hone me koi burayi nahi hai...
    par jada jajbati honge par taklif hona swabhavik hai...
    isliye balance hona jaruri hai.
    sundar,gahan rachana:-)

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  7. बदलाव भी जरुरी हैं... बहुत सुन्दर रचना...

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  8. परिवर्तन सृष्टि का नियम है -लेकिन मन का जुड़ाव हो जाने पर यह खटकने लगता है.

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  9. बढ़िया प्रस्तुति ||

    बधाई ||

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  10. बहुत सुन्दर....बधाई .

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  11. चक्र तो प्रकृतिक ही है
    फिर इस बदलाव से
    मैं क्यों परेशान ?
    क्यों हूँ हैरान ?

    समझ का फेर है !!

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  12. बदलाव एक शाश्वत सच है.बदलना मजबूरी नही जरूरी है.. बहुत सुन्दर मनोभाव...

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  13. few changes can b painful..
    but, still its part of life !!

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  14. बदलाव सृष्टि का नियम है...जज्बाती होने से तकलीफ़ होती है...सुंदर अभिव्यक्ति!

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  15. सिर्फ इसलिये कि
    चुकानी पड़ती है
    कुछ तो कीमत
    जज्बाती होने की ।

    Sach Hai..... Bahut Sunder

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  16. एक अनकही हकिकत और सामयिक जज्बातों की सुन्दर शब्दों से सजी एक बेहतरीन अभिवक्ति...

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  17. bilkul sach kaha aapne....jajbati hone ka nuksan to uthana padta hai.....dil ko chu gayi aapki rachna.....1 of your best creation :)

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  18. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ. अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)

    बेहतरीन लेखन ..बधाई स्वीकारें



    नीरज

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  19. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  20. अभिभूत करती रचना सार्थक प्रयास बधाईयाँ जी

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  21. कितनी जल्दी
    बदल जाते हैं दिन
    कितनी जल्दी
    बदल जाते हैं सपने
    अपेक्षाएँ ,कसमें ,वादे
    चित्र भी, चरित्र भी
    कभी ये मजबूरी होती है
    और कभी छलावा
    चेहरे के भीतर के
    चेहरे का दिखावा
    इन शब्दों के मर्म बड़े गहरे हैं...
    सादर..!!

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  22. चक्र तो प्रकृतिक ही है
    फिर इस बदलाव से
    मैं क्यों परेशान ?
    क्यों हूँ हैरान ?

    सिर्फ इसलिये कि
    चुकानी पड़ती है
    कुछ तो कीमत
    जज्बाती होने की ।



    मन को गहरे तक छू गई एक-एक पंक्ति...
    एक-एक शब्द.... सुन्दर बिम्ब प्रयोग....
    सार्थक रचना....बधाई...

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  23. जो आपका मन कहता है उसकी अभिव्यक्ति बहुत सुन्दर है..

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  24. सुन्दर अभिव्यक्ति....

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  25. चक्र तो प्रकृतिक ही है yah jante to hain lekin mante nahin. shayad yahi pareshan hone ki vajh

    www.parchhayin.blogspot.com

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  26. वाह !!! बहुत सुन्दर..

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  27. सिर्फ इसलिये कि
    चुकानी पड़ती है
    कुछ तो कीमत
    जज्बाती होने की ।

    बिकुल सहमत हूँ.....एक बार नहीं लगभग हमेशा ही चुकानी पड़ती है ।

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  28. "चक्र तो प्रकृतिक ही है
    फिर इस बदलाव से
    मैं क्यों परेशान ?
    क्यों हूँ हैरान ?"
    परिवर्तन प्रकृति का नियम है | सावन, पतझर, धूप, बरखा कुछ भी तो स्थायी नहीं!
    सहना है हर दुःख सुख के आगमन के लिए: यही सिखाती है प्रकृति |
    सुन्दर अभिव्यक्ति |

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  29. पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

    इस रचना के लिए बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  30. बदलाव ही जीवन हैं

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  31. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति । धन्यवाद ।

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  32. आपकी आज बहुत सी रचनाएँ पढ़ी सब भावपूर्ण सार्थक और मार्मिक ..ये रचना कुछ ज्यादा ही दिलके करीब लगी ..बंधाई स्वीकारें

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