प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

15 December 2012

कुछ बातें ....

कुछ बातें
होती हैं
हाथी के दांतों की तरह
जो सोची जाती हैं
कहीं नहीं जातीं
जो कही जातीं हैं
सोची नहीं जातीं
फिर भी
कभी मजलिसों में 
महफिलों में
या तीखी बहसों में
कह दी जाती हैं
हाथी दांत के जैसा
खुद का
अक्स दिखाने को।

©यशवन्त माथुर©

19 comments:

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

  1. बिल्कुल सही कहा .... यदि मन की हर बात कह दी जाए तो हंगामा न हो जाए ... बहुत बढ़िया!

    ReplyDelete
  2. कहना भी बेकार है...
    क्योंकि वो दिखेगे ही नहीं उन दांतों का खासा ख्याल जो रखा जाता है..बेहतरीन रचना....:-)

    ReplyDelete

  3. कड़वी पर सच्चाई ! ऐसो पर विश्वास नहीं होता !!

    ReplyDelete
  4. बातों का क्या...
    सच कहा आपने!

    ReplyDelete
  5. सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  6. सच न कहने की हिम्मत है न सुनने की....करें भी तो क्या करें...

    सस्नेह
    अनु

    ReplyDelete
  7. बिलकुल सही कहा आपने यशवंत भाई.

    ReplyDelete
  8. aisi bhi baatein hoti hain .. kuchh din ne kahaa ..kuchh bhi nahin ..

    ReplyDelete
  9. बेहतर लेखन !!

    ReplyDelete
  10. sach hi kaha, haathi ke dant

    ReplyDelete
  11. कड़वी सच्चाई लेकिन खरी १०० प्रतिशत

    ReplyDelete
  12. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 19/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    ReplyDelete
  13. सच्चाई हमेशा कड़वी ही क्यो होती है..सही और सटीक रचना..शुभकामनाएं यशवंत..

    ReplyDelete
  14. yeh aadambar se bhari duniya hain,
    har koi liye firte do-do chehra hain,
    dusre par apni bhadhaas nikaalte hain,
    aur apne upar jara si koi ungli uthaye
    to tilmilaate hain...
    acchi likha aapne.

    ReplyDelete
  15. सच कहा है ... किन्तु इस सच को कहने सुनने की हिम्मत भी जरूरी है ...
    बहुत खूब ...

    ReplyDelete
  16. sahi baat kahi hai rachna ke maadhyam se

    shubhkamnayen

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!