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13 December 2012

वीरता का पुरस्कार ......?

हिंदुस्तान-लखनऊ-13/12/2012 (पृष्ठ-16)
वो
एक माँ है
बेटी है
पत्नी है
उसने

11 साल पहले
संसद पर
गोली खाई है
वो वीर है
इतिहास के पन्नों पर

उसकी वीरता
आज लगा रही है झाड़ू
दिल्ली की सड़कों पर
निर्भर हो कर
ठेकेदार के करम पर

क्या वो झाड़ पाएगी
कागज के दबे पन्नों से धूल
क्या वो निकाल पाएगी
अलमारी मे छिपी
उस मोटी फाइल का बंडल
जिसमें छुप कर
कुंभकरणी नींद सो रहा है
उसकी वीरता का सबूत ?

या
यूं ही
चार हज़ार की
चक्की में
पिसता उसका जीवन
हर साल छपा करेगा
अखबार के पिछले पन्ने पर ?

(आज के 'हिंदुस्तान' मे छपे समाचार से प्रेरित-देखें चित्र)

©यशवन्त माथुर©

11 comments:

  1. सरकार को त्वरित कार्यवाही कर अपनी अस्मिता की रक्षा करनी चाहिए ,अन्यथा कल को कोई बलिदान करने से मुंह मोड़ लेगा

    MAIN AAPAKI SAJAGATA KO NAMAN KARATA HUN.

    ReplyDelete
  2. क्या वो झाड़ पाएगी
    कागज के दबे पन्नों से धूल
    क्या वो निकाल पाएगी
    अलमारी मे छिपी
    उस मोटी फाइल का बंडल
    जिसमें छुप कर
    कुंभकरणी नींद सो रहा है
    उसकी वीरता का सबूत ?

    या
    यूं ही
    चार हज़ार की
    चक्की में
    पिसता उसका जीवन
    हर साल छपा करेगा
    अखबार के पिछले पन्ने पर ?


    सुंदर रचना।।।

    ReplyDelete
  3. मार्मिक सत्य , सार्थक अभिव्यक्ति !!!

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  4. गंभीर प्रश्न उठाती रचना .... सरकार की नींद खुलनी चाहिए ।

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  5. सरकार की नींद ऐसे समय कुम्हकरनी हो जाती है :((

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  6. विचारणीय बहुत उम्दा सृजन,,,, यशवंत जी बधाई,,,

    recent post हमको रखवालो ने लूटा

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  7. विचारणीय रचना...आवाज तो उठानी ही चाहिए...

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  8. संवेदनशील प्रस्तुति ..आभार!

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