प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

23 November 2015

मुनासिब नहीं

मुनासिब नहीं पत्थरों से कुछ कहना
क्योंकि पत्थर इंसान नहीं होते
मुनासिब नहीं इन्सानों से कुछ कहना
क्योंकि इंसान पत्थर नहीं होते
तो किससे कहें किस्से अपने मन के
डायरी के सब पन्ने भी अपने नहीं होते
हवा को अपना बनाकर है हमें यूं ही चलना
कहीं तो पहुंचेंगे ही कहीं उड़ते उड़ते।

~यशवन्त यश©

No comments:

Post a Comment

Popular Posts

+Get Now!