प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

05 February 2019

अगर समय भी कुछ कह पाया तो.....

सुनो!...ये समय जो चल रहा है न ...न जाने क्यों कभी-कभी ऐसा लगता है कि ...काश! कभी रुक पाता।..... काश! कभी कह पता वह भी अपने मन की। हम तो चूंकि इंसान हैं ...या कहें कि प्राणी हैं.... क्योंकि हम सब अपनी अपनी भाषा में....अपने-अपने तरीके से समय के इन्हीं पलों में ....एक दूसरे ....से कुछ न कुछ कह-सुन लेते हैं ...अपना मन हलका कर लेते हैं ...लेकिन लगातार चलता हुआ यह समय बहुत  चाह कर भी ...अपने मन की कुछ कह नहीं कह पाता ...क्योंकि...समय की नियति में सिर्फ चलना है....निर्बाध चलना ।......बस चलना और सिर्फ चलते ही रहना । यह समय....अगर कभी कुछ भी कह पाया  ....तो निश्चित ही समय के साथ हम सब ...बस ठहर ही जाएंगे ....हमेशा के लिए। 
.
-यश©
05/02/2019 

1 comment:

  1. चलते रहें समय के साथ कभी थोड़ा आगे कभी थोड़ा पीछे भी :)

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!