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11 March 2021

उपलब्धि...

जीवन के 
अनवरत चलने के क्रम में 
अक्सर 
मील के पत्थर आते जाते हैं 
हम गुजरते जाते हैं 
समय के साथ 
कहाँ से कहाँ पहुँच जाते हैं 
कभी शून्य से शिखर पर 
कभी शिखर से शून्य पर 
कई चढ़ाईयों- ढलानों 
कँटीले रास्तों, नदियों-तालाबों 
और पहाड़ों के साथ 
रफ्तार को थामते हुए 
थोड़ा रुकते हुए 
देखते हुए 
हर मौसम के रंग 
प्रकृति के संग 
जुड़ जाती हैं 
अनायास ही 
कुछ ऐसी उपलब्धियाँ भी 
जिनका प्रतिफल 
कुछ न होते हुए भी
आत्मसंतुष्टि तो 
होता ही है।  

-यशवन्त माथुर©
11032021

यह पोस्ट/ ये पंक्तियाँ मेरे जीवन में एक उपलब्धि ही है, क्योंकि इसी के साथ मैंने 1000 मौलिक अभिव्यक्तियों (हालांकि समय-समय पर लिखे कुछेक लेखों को इसमें नहीं जोड़ा है) की संख्या प्राप्त कर ली है। मैं अपने लिखे को 'कविता' की श्रेणी में नहीं रखता, इसलिए इसे 'पंक्तियाँ' ही कहना ज्यादा सही समझता हूँ। अपने पिताजी के प्रोत्साहन से 7 वर्ष की आयु से शुरू होकर, कछुआ चाल से चलते हुए इस संख्या तक पहुँचने में मुझे 30 वर्ष से कुछ अधिक समय लगा। 
बहरहाल लिखने का क्रम अभी जारी रहेगा। 

-यशवन्त 

15 comments:

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  1. पूर्णतः सहमत हूँ यशवंत जी मैं आपकी इस अभिव्यक्ति से ।

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  2. सचमुच 1000 अभिव्यक्ति उपलब्धि है वैचारिकी समृद्धि को लिपिबद्ध करने की।
    लेखन की यात्रा अनवरत जारी रहे अनेक उपलब्धियाँ और जुड़ते रहे मेरी भी शुभकामनाएं स्वीकार करें।
    सादर।

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  3. बहुत सुन्दर रचना।
    --
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  4. अनायास ही
    कुछ ऐसी उपलब्धियाँ भी
    जिनका प्रतिफल
    कुछ न होते हुए भी
    आत्मसंतुष्टि तो
    होता ही है।
    ..आत्मसंतुष्टि तो सबसे बड़ी उपलब्धि है,हालांकि सबका अपना अपना नजरिया होता है..

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  5. प्रभावशाली लेखन - - शुभ कामनाओं सह।

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  6. बहुत सुन्दर

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  7. शून्य से शिखर पर या शिखर से शून्य पर आना जब एक जैसा लगे तभी भीतर संतोष का अंकुर उगता है, तब यात्रा अनायास ही जारी रहती है, सार्थक लेखन !

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