प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

19 March 2021

वक़्त के कत्लखाने में-21

समय के साथ-साथ 
सब चेहरे 
धुंधले होने लगते हैं 
लिखे हुए शब्द 
मिटने से लगते हैं 
सदियों से सहेजे हुए कागज़ 
गलने लगते हैं 
लेकिन 
उन पर रचा हुआ इतिहास 
श्रुति बन कर 
गूँजता रहता है 
वक़्त के कत्लखाने में। 

-यशवन्त माथुर©
19032021

5 comments:

  1. इतिहास में तो न जाने क्या क्या क़त्ल हो जाता है ...विचारणीय .

    ReplyDelete
  2. वही इतिहास कालांतर में पुराण बनकर जीवित रहता है मनों में

    ReplyDelete
  3. बेहतरीन अभिव्यक्ति ।

    ReplyDelete
  4. इतिहास श्रुति बनकर गूँजता रहता है...
    वक्त के कत्लखाने में...
    सटीक एवं सार्थक सृजन।

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!