देखा जाए तो
बातें वही हैं
हम सबकी
जिन्हें कोई एक कहता है
दूसरा भी
अपने शब्द देकर
सिर्फ दोहराता है।
देखा जाए तो
हमारी हर सभ्यता का
इतिहास वही है
जिसे हर युग
पुरा से
विकास के चरम तक
पहुंचाता है।
देखा जाए तो
पृथ्वी के
एक गोलार्ध से
दूसरे गोलार्ध तक
सीमाओं के बंधन से परे
हम मनुष्य
जीवित हैं
एक ही प्राणवायु से
और हमारे सामने
साक्षात हैं
'भगवान'
पंचतत्वों के रूप में।
तो इतना सब देखने के बाद भी
आखिर क्यों?
हम उलझे हुए हैं
मन के कई भेदों में
जबकि
जन्म के समय
हम से कोई भेद
किया तो नहीं ही गया।
-यशवन्त माथुर©
28 05 2026
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सुंदर
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ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 4 जून 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 4 जून 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
बेहतरीन
ReplyDeleteसुन्दर रचना
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