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14 October 2010

बचपन की यादें

हम भी कभी बच्चे थे
हँसते थे मुस्काते थे                                         
कभी लड़ते झगड़ते थे तो
कभी एक हो जाते थे

हाथी घोड़े भालू बन्दर
छुक छुक गाड़ी में बैठे अन्दर
सुन्दर गीत गाते थे

भेदभाव सब भूल हम
मिलजुल खाना खाते थे
एक दूसरे को गले लगा कर
मिल कर गाना गाते थे

वैसे दिन अब कहाँ
वैसी खुशी अब कहाँ
बस्ते में दब रहा है बचपन
वैसा सुकून अब कहाँ

वो बचपन की मीठी यादें
अब भी मन में आती हैं
ख्वाबों में सब सच हो जातीं
सुबह हो धुंधला जाती हैं

कभी न करते कोई बहाना
खुशी खुशी स्कूल को जाते थे
हम भी कभी बच्चे थे
हँसते थे मुस्काते थे.


(मैं मुस्कुरा रहा हूँ..)

11 comments:

  1. कभी न करते कोई बहाना
    खुशी खुशी स्कूल को जाते थे
    हम भी कभी बच्चे थे
    हँसते थे मुस्काते थे...

    ---

    I still smile and laugh.

    .

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  2. truly brilliant..
    keep writing......all the best

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  3. bahut achha likha yashwant... sachmuch bachpan ki har yaad chehare par muskurahat le aati hai...

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  4. यशवंत भैया .... मैं बहुत खुश हूँ.... एक तो बचपन की कविता के लिए और दूसरा आपने प्रोफाइल फोटो बहुत ही बढ़िया लगाया है... ये आप ही हो न....

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  5. वा भई यशवंत लगे रहो ।

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  6. बहुत सुन्दर ........

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  7. काश कि वही बचपन फिर से लौट आये। सुन्दर रचना। बधाई

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  8. प्रिय चैतन्य,रिमझिम,आदरनीया निर्मला जी,दिव्या जी,मोनिका जी,आदरणीय संजय जी,शरद जी,रविन्द्र जी इस कविता को पसंद करने के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद.

    चैतन्य--हाँ ये मेरे बचपन का फोटो है.इसे अब प्रोफाइल पर लगा लिया है.

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  9. bachpan ki yaad dilati rachna!
    ye yaadein kabhi na dhoondhli hon!

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