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02 July 2012

जुलाई का महीना

जुलाई का महीना
बस्ते के बोझ का महीना
फीस और किताबों की
कीमत से पस्त
मगर भविष्य को देख कर
खुशी से मुसकुराती
जेब का महीना
आशा का महीना
अभिलाषा का महीना 
ऊंची महत्वाकांक्षा का महीना

(धरती की झुर्रियां)हिंदुस्तान-लखनऊ-02/जुलाई/2012
मगर इस महीने में
जब धरती बहाती है
खुशी और गम के आँसू
कंक्रीट ,पत्थर और
शीशे के महलों  के भीतर
बसने वाले
कृत्रिम वायु मण्डल ने
कर दिया है चेतना हीन

जुलाई का महीना
यौवन पर इठलाने वाली
धरती की
झुर्रियां देख कर
रो रहा है
मन ही मन।

©यशवन्त माथुर©

25 comments:

  1. :( :(
    Pehle schools reopen hote the barish k sath...par ab :(:( dharti par jhuriyaa hi dekhne ko milti h :(

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  2. सार्थकता लिए सटीक अभिव्‍यक्ति ।

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  3. अच्छा लिखा है यशवंत जी, जुलाई के माह में मेघों के आगमन को तरसती ..... धरती की प्यास...... और अब कितना इंतज़ार ?

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  4. जुलाई को ध्यान में रखकर बहुत बढियां लिखा है...

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  5. bahut sundar likha hai....bs ab intjaar khtm hone wala hai....

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  6. आपकी रचना हमेशा सच का आईना दिखलाती है .... !
    बिहार का भी यही हालात है .... !!

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  7. सच्ची ! अभी के मौसम और हालात को देखते हुए.......बहुत बढ़िया यशवंत जी !

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  8. बहुत सुन्दर रचना...
    :-)

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  9. बहुत सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति...

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  10. बहुत सुन्दर और सामायिक रचना..
    सस्नेह.

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  11. जुलाई का महीना
    यौवन पर इठलाने वाली
    धरती की
    झुर्रियां देख कर
    रो रहा है
    मन ही मन।
    आज धरती प्यासी है, बढ़ते जा रहे हैं कंक्रीट के जंगल... सटीक अभिव्यक्ति...

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  12. सटीक अभिव्‍यक्ति ....

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  13. अरे यशवंतजी यह तो इतेफाक हो गया की इस साल उत्तर प्रदेश में वर्षा नहीं हुई वरना तो जुलाई सावन की झड़ी का मौसम होता है .....खुशियाँ बिखेरने का मौसम होता है ...क्यों है न !

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  14. जुलाई का महीना
    यौवन पर इठलाने वाली
    धरती की
    झुर्रियां देख कर
    रो रहा है
    मन ही मन।
    वाह ,बहुत सुन्दर.........

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  15. कल 04/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' जुलाई का महीना ''

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  16. जुलाई का महीना
    यौवन पर इठलाने वाली
    धरती की
    झुर्रियां देख कर
    रो रहा है
    मन ही मन। .....इस बार की जुलाई सब को रुला रही है..बहुत सुन्दर यशवंत

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  17. सच कहा है .. जुलाई तो ऐसी कभी न होती थी ...
    जल्दी ही ये भी ऐसी नहीं रहेगी ...

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  18. जुलाई में सावन की मनभावन फुहार

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  19. बहुत उम्दा सार्थक अभिव्यक्ति,,,

    MY RECENT POST...:चाय....

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  20. सुन रहे हो मेघ ,इनकी पुकार -बरसो न !

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  21. ये महीना भी भीगेगा

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  22. **♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**
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    उम्दा प्रस्तुति के लिए आभार


    प्रवरसेन की नगरी
    प्रवरपुर की कथा



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ पहली फ़ूहार और रुकी हुई जिंदगी" ♥


    ♥शुभकामनाएं♥

    ब्लॉ.ललित शर्मा
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    ReplyDelete
  23. जुलाई का महीना
    यौवन पर इठलाने वाली
    धरती की
    झुर्रियां देख कर
    रो रहा है
    मन ही मन।

    kya bat hai...

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  24. सत्य हैं जी .....सादर

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