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11 July 2012

दोनों वक़्त का चाँद

[Mobile Photo:10/07/2012]



  











ये चाँद भी
बदसूरत है
बेहयाई से दिखता है
दोनों पक्षों में
रात में
और दिन में भी

बिना सोचे
बिना समझे
'फिकरों'* की फिकर
किये बगैर
ये चाँद
करता है परिक्रमा
मेरे साथ
मेरी सोच की

दुनिया की।

*फिकरा =ताना(व्यंग्य)


©यशवन्त माथुर©

26 comments:

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  1. फिकरे बजी की फिकर, नहीं करे यशवंत |
    किस सर का सर है सखे, कौन चाँद श्रीमंत ||

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  2. FIKRON SE DAR JIYE TO PHIR KYA JIYE,
    APNI AUKAT PAR JIYE,JINA USI KA NAM HAE

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  3. चाँद हर हाल में खूबसूरत होता है ... शुभकामनाये

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  4. apane aap ko swikarana hi apne mein sampurnata darshta hai....achhi abhivykati...yashwant ji..
    ( server slow hone se roman mein likhna majburi ho jati hai..iske liye kshama prathi hoon)

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  5. मेरे भी चाँद निकल रहे है ... यसवंत भाई

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  6. आज हमने भी एक कविता लिखी चाँद पर....
    बड़ा फर्क है मगर तुम्हारे और हमारे चाँद में :-)
    हमारा निकले तो खुशी..तुम्हारा निकले तो गम..
    सस्नेह.

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  7. आपकी पोस्ट कल 12/7/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 938 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  8. वास्तव में ..बहुत ही अच्छी ... फिकरों की फ़िक्र ....के बगैर ...इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है ....

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  9. चाँद चाँद फर्क होता, निकलता दोनों सम
    एक निकलने में हो खुशी,दूजे में हो गम,,,,,,,

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  10. नयी सोच.....
    एक अलग चाँद जो बदसूरत है...

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  11. आपके इस जज्बे को सलाम .... !
    दूसरों पर फिकरा कसना तो बहुत आसान होता .... !

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  12. 'chaand' ke liye Yeh nazreeya bhii khub raha!
    :)

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  13. चाँद चाँद में फर्क है,निकलते दोनों सम
    एक निकले में खुशी हो, दूजे में हो गम,,,,,,,

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  14. वाह ! बहुत सुंदर सोच जो चाँद को भी साथ लिये जाती है !

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  15. ये चाँद आता भी तो बिना पूछे है और फिर जाता भी नहीं तमाम कोशिश के बावजूद ...

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  16. चाँद चमकती है तभी, जब यौवन ढल जाय।
    पीले पत्तों में नहीं, हरियाली आ पाय।।

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  17. यशवंत जी, बहुत खूब....
    दोनों चाँद की खूब विवेचना की हा आपने | :)

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  18. बहुत अच्छा व्यंग |कुछ भी हो दौनों में कुछ तो समानता है है |
    आशा

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  19. इस चाँद ने क्या दिमाग पाया है!:)

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