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04 January 2011

मैं आज़ाद हूँ

अब नहीं कोई बंधन
न दोस्ती
न दुश्मनी
चलता  जा रहा हूँ
अपनी ही धुन में
बेखबर ज़माने से
बदनीयती से
बदले की आग से
शिकवों से
बे असर
मैं आज़ाद हूँ !

18 comments:

  1. नकारात्मकता पर जीत की सार्थकता कहती रचना!
    सुन्दर!

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  2. सुन्दर रचना ! लाजवाब प्रस्तुति !

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  3. सही कहा आपने
    बदले की आग से
    शिकवों से
    बे असर
    मैं आज़ाद हूँ !

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  4. बहुत कुछ बदला है आगे भी बदलेगा। शुभकामनायें।

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  5. आपका ब्लॉग हमें अच्छा लगा, हम
    आपके ब्लॉग पर आते रहेंगे..थैंक्स !

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  6. चलता जा रहा हूँ
    अपनी ही धुन में
    बेखबर ज़माने से

    खुश रहने की पहली सीढ़ी....यही है सकारात्मक सोच और अवसादों से ऊपर उठने की कला....बहुत सुंदर...

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  7. चलता जा रहा हूँ
    अपनी ही धुन में
    बहुत खूब ! सकारात्मक स्वाभिमानी सोच . लिखते रहिये ..

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  8. ek aajad man ke bhavon ko sundar v yatharth roop me prastut kiya hai .badhai. nav varsh ki hardik shubhkamnaye .

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  9. मंजिल पाने के लिए अकेला चलना भी सुखकर होता है कभी कभी .अपनी धुन में...

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  10. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  11. जो आज़ाद महसूस करता है वही ज़िन्दगी की जंग जीतता है बशर्ते कि आज़ादी किसी मजबूरी मे न हो। शुभकामनायें।

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  12. आज़ादी का सही मतलब तो नहीं निकला //
    पर आज़ाद है आपकी कविता
    और आपकी लेखनी

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  13. नव वर्ष की शुभकामनाएं ।

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  14. सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  15. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.

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  16. यही बेहतर भी है जी...चलते जाएँ आजाद होकर...

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