प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

18 April 2012

अनजान बन जाऊं (ब्लॉग पोस्ट नंबर-300)

कभी कभी सोचता हूँ
हर चीज़ से
हो जाऊं अनजान
खाली सा हो जाऊं
किसी ब्लैंक
सी डी  या डी वी डी
की तरह
और पहुँच जाऊं
कुछ हाथों मे
जो कुछ भी लिख दें
कुछ भी कह दें
अच्छा या बुरा
जो मन मे हो
और मैं
जान जाऊं
मन के भीतर के
दबे हुए
मौन का सच!

39 comments:

  1. मने के उद्‍गार ! बहुत भली लगी आपकी चाह ! बधाई!

    ReplyDelete
  2. सबके मनका अहसास ...जो कभी न कभी हर दिल में उठता है ...लेकिन कोई इतनी सादगी से समझा नहीं पाता...प्यारा लगा ......

    ReplyDelete
  3. और मैं
    जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच!

    गहन अंतर्मन कि चाह .....
    सुंदर शब्द
    शुभकामनायें .

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर रचना .....

    ReplyDelete
  5. डॉ रमेश यादव जी का कहना है-

    पता नहीं क्यों आपका ब्लॉग मेरा कमेन्ट नहीं ले रहा है

    हमेशा मन की ही सुननी चाहिए.मन एक तरह का संकेतक है.उसको जानिए,समझिए और आगे बढ़िए.
    बेहतर सृजन
    शुभकामनाओं सहित !

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर यशवंत.....

    इतनी बड़ी बात कैसे आसानी से कह दी...............
    बहुत सहज सी अभिव्यक्ति..........

    खुश रहो...
    सस्नेह
    अनु

    ReplyDelete
  7. जो मन मे हो
    और मैं
    जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच! ..............sunder abhivyakti ...kash aisa ho jaye .....bhitar ka sab sach samne aa jaye

    ReplyDelete
  8. और मैं
    जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच....ye sach janna khud ko janna hai ...aur khud ko jan gaye to aasman apni mutthi men hota hai....

    ReplyDelete
  9. koshish karne men kya harj hae.

    ReplyDelete
  10. कृपण हृदय ख्वाहिश करे,
    करना चाहे अर्पण ।

    भाव हुए महरूम शब्द से,
    झूठ ना बोले दर्पण ।।

    ReplyDelete
  11. मन की पीड़ा कुछ ऐसी भी होती है अक्सर.....

    ReplyDelete
  12. मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच!
    बहुत से प्रश्न अनुत्तरित नहीं रह सकेंगे .... !!

    ReplyDelete
  13. जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच..mann ki baat sahaj shbdon mein kah daali

    ReplyDelete
  14. गहन भाव लिए सुंदर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  15. मौन का सच जान लेना इतना आसान !
    - सुन्दर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  16. बधाई देना तो भूल ही गई थी .... 300 यानी तीसरी सेंचुरी ..... बहुत-बहुत बधाई ..... :)दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की हो .... :)))))))))

    ReplyDelete
  17. 300 वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई। ये मन जो ना कराये कम है।

    ReplyDelete
  18. why don't you try to write some love poems.

    Love your voice!


    URVASHI

    ReplyDelete
  19. बहुत सुंदर कविता...बधाई !

    ReplyDelete
  20. sundar rachna...man to bahut karta hai dusro ka man padhne ka..par agar hum sab ki soch ki parvah karne lage to shayad ji hi nahi payenge...

    ReplyDelete
  21. बहुत ही सुन्दर यशवंत.....बधाई ३०० वीं पोस्ट के लिए।

    ReplyDelete
  22. मेल पर प्राप्त -

    indira mukhopadhyay ✆

    10:43 AM

    to me
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है.

    ReplyDelete
  23. 300 वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई यशवंत भाई

    ReplyDelete
  24. सबसे पहले तो 300वीं पोस्‍ट के लिए बधाई .. बहुत ही अच्‍छा लिखा है ... शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  25. aap jane pahchaane bane rahe yahi dua hai.. 300th post ke liye Dheron Badhayi aur ujjaval bhavishya ki shubhkamnayen :)

    ReplyDelete
  26. 300 वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई यशवंत भाई
    सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  27. बहुत खूब यशवंत जी , कभी न कभी हम सभी की इच्छा होती है एक शून्य बन जाने की............ सुन्दर अभिव्यक्ति!
    कितना अच्छा होता ,
    जो खाली होता ये मन
    अनंत, अनादि, शून्य गगन सा,
    न कोई हलचल न कोई तड़पन

    पर व्योम नहीं ये तो सिन्धु है,
    भावों के रत्न लिए अंतस में,
    हरदम मंथन को प्रस्तुत,

    ReplyDelete
  28. शुक्रवारीय चर्चा-मंच पर

    आप की उत्कृष्ट प्रस्तुति ।

    charchamanch.blogspot.com

    ReplyDelete
  29. Bahut sundar..Sochi sachchi man ki bat ....

    ReplyDelete
  30. सच कहा आपने जो कुछ अन्दर होता है वह जब बाहर आता है तो मन की बात समझ आने लगती है..
    सुन्दर प्रस्तुति ..
    ३०० वीं पोस्ट के लिए बधाई..

    ReplyDelete
  31. ३०० वीं पोस्ट के लिए ,यशवंत जी बहुत२ बधाई,..शुभ कामनाए
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर अभिव्यक्ति,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

    ReplyDelete
  32. मन के भीतर के मौन को जानने की चाह भली लगी ...
    तीन सौवीं पोस्ट की बहुत बधाई !

    ReplyDelete
  33. ३०० वीं पोस्ट के लिए बधाई....

    ReplyDelete
  34. कुछ शब्दों में गहरी बात ... मौन का अर्थ ...क्या इतना आसान है इसे पाना ...

    ReplyDelete
  35. वाह बहुत खूब ...सार्थक सोच

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!