प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

05 March 2013

वो पल....

बचपन में
कभी
जिन गलियों से
गुज़रा करता था 
वो गलियाँ
वो सड़कें
अब बन चुकी हैं
कहानी
एक बीते दौर की
और आज
जब भी करता हूँ याद
उन बीते पलों को 
कबूतरखाने जैसा
यह ठौर
निकलने नहीं देता
खुद की जद से।

©यशवन्त माथुर©

12 comments:

  1. जीवन ने परिवर्तन तो होते ही रहते है वस यादें रह जाती है.

    ReplyDelete
  2. जीवन ने परिवर्तन तो होते ही रहते है वस यादें रह जाती है.

    ReplyDelete
  3. बढ़िया है प्रिय यशवंत-

    ReplyDelete
  4. पर निकलना तो पड़ता है .... सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  5. यशवंत जी ठीक कहा आपने आपका इंतज़ार है
    http://www.saadarblogaste.in/2013/03/15.html

    ReplyDelete
  6. कबूतरखाने जैसा
    यह ठौर
    निकलने नहीं देता
    खुद की जद से।
    बहुत ही गहरी बात !!
    शुभकामनायें !!

    ReplyDelete
  7. Yaadein to hoti hi yad rakhne k liye h :)

    ReplyDelete
  8. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (06-02-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

    ReplyDelete
  9. अतीत की सुनहली यादें हमें अक्सर घेर लेती हैं ...
    सुन्दर रचना !

    ReplyDelete
  10. apni zaden bhi to hamne khud hi baandh rakhi hain na....

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!