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01 March 2013

क्योंकि वो इंसान नहीं हैं

आसमान मे उड़ते पक्षी
सड़क पर घूमते
आवारा जानवर 
नदियों तालाबों और समुंदर में तैरते
जलचर
सभी कर रहे हैं सफर
बिना किसी लक्ष्य
बिना किसी उद्देश्य के 
क्योंकि
वो इंसान नहीं हैं।
©यशवन्त माथुर©

6 comments:

  1. उनके पास न तो दिल-दिमाग
    और
    तन-मन ढंकने की जरूरतें
    अनेक भी तो नहीं हैं !!

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  2. बहुत ही सुन्दर ...

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (2-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  4. आसमान मे उड़ते पक्षी
    सड़क पर घूमते
    आवारा जानवर
    नदियों तालाबों और समुंदर में तैरते
    जलचर
    सभी कर रहे हैं सफर
    बिना किसी लक्ष्य
    बिना किसी उद्देश्य के
    क्योंकि
    वो इंसान नहीं हैं।


    यशवंत जी आपकी बातों से सहमत होते हुए भी एक विचार मन में आया . क्या हम उनकी भाषा, भावनाएं, लक्ष्य, को जानते है? सभी जीव अपनी शैली में अपनी सीमाओं में जीते हैं। एक जीव दुसरे के सामान? शायद इश्वर की अनुपम अद्वितीय कृति?

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  5. इंसान होना भी दुखी करता है आजकल तो ... हमारी प्रजाति सबसे क्रूर और निर्मम हो गयी है .. हम लक्ष्यों में इतना घिर गए हैं कि सारी इंसानियत जो हमें इन पंछियों और जानवरों से भिन्न बनाती थी, वो सब खोता जा रहा है

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  6. वे सब प्रकृति से जुड़े हैं..मानव कट गया है..

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