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14 March 2013

क्षणिका

कभी कभी
बहुत मुश्किल लगती है
कुछ लिखने के लिये
किसी विषय की खोज
फिर भी
निगाहों के चारों ओर
कुछ तो होता ही है
लिखने के लिये।
©यशवन्त माथुर©

13 comments:

  1. सार्थक अहसास,आभार.

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  2. सही कहा.. मुश्किल जरुर होता है पर बहुत कुछ मिलता भी ..

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  3. मेरे लिए
    कुछ नहीं होता
    लिखने के लिए ....
    शुभकामनायें !!

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  4. कुछ तो होता ही है .....अच्छा है

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  5. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 16/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  6. ऐसे भी क्षण आतें होंगे ,
    मन भी बोझिल होता होगा ,
    मन चाह कर भी जब कुछ लिख न पाता होगा
    अहसास भी कैसा कसेल्ला होता होगा......... बढ़िया अभिव्यक्ति

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  7. saral, sehaj, gehan abhivyakti

    shubhkamnayen

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