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15 May 2020

यह एक चेतावनी है

महामारी के तूफान से भरा 
यह कैसा वर्तमान 
जो अपने भूत और भविष्य को 
धूल के गुबारों में लेकर 
बढ़ता चला जा रहा है 
इतिहास बनता जा रहा है। 

क्या कभी सोचा था 
कि शांत धारा के भीतर मचा भूचाल 
इस तरह से अपने रंग दिखाएगा 
जो कुछ था गतिमान 
सब ठहर जाएगा 
थम जाएगा। 

यह सच है 
और सच यह भी है 
कि विश्व विजेता इंसान 
प्रकृति से हारा ही है 
मैदान छोड़ कर 
सदा भागा ही है। 

यह तूफान चेता रहा है 
कि सुधर जाओ 
अपनी हदों में सिमट जाओ 
वरना नई प्रजाति का भविष्य 
अपनी किताबों में पढ़ेगा 
लुप्त हो चुके मानव की 
विनाश गाथा। 

-यशवन्त माथुर ©
15/05/2020

2 comments:

  1. Genius thoughts
    Extremely well drafted contain deep message for all human beings.
    Very well said..

    ReplyDelete
  2. जैसे पढ़ते हैं हम सिंधु घाटी की सभ्यता का इतिहास, मानव यदि विकास के नाम पर विनाश के बीज बोता रहा तो वह दिन दूर नहीं, लेकिन आज भी प्रकृति के पहरेदार हैं जो इस मानवता को नए रूप में आगे ले जायेंगे

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