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09 September 2010

जय जय नेता जी की.....

ढोल बज रहे थे

नारे लग रहे थे

गले में हार डाले नेता जी

चल रहे थे!

नेता जी चल रहे थे

समर्थक नाच रहे थे

विजयी मुद्रा में

सब लोग

गद गद हो रहे थे!

हम ने पूछा तो किसी ने बताया

न पार्टी बदली थी

और न मंत्री की

कुर्सी मिली थी

कल पहली बार

'वो' उनसे हारी थी

नेता जी ने मक्खी मारी थी!!

(जो मेरे मन ने कहा...)

6 comments:

  1. क्या बात है..वैसे भी नेता जी विकास के कार्यों में कुछ नहीं करते लेकिन जहां उससे सम्बंधित धन होता है उसे अजगर की तरह निगल जाते हैं। अच्छा लिखा है। बधाई...

    ReplyDelete
  2. वाह वाह क्या बात कही है।
    इसनके अलावा नेताओं को और काम ही क्या है।
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    ReplyDelete

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