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27 September 2010

पता नहीं

बड़ी अजीब होती है  
ये जीवन की राह
किस मोड़ पर ले जाए
पता नहीं

मैं आज जहाँ खड़ा हूँ
बड़ा अजीब मोड़ है
हर तरफ गड्ढे ही गड्ढे
क्यों कांटे बिछे हैं
पता नहीं

ये भावनाएं हैं
जो घुमड़ती हैं हर तरफ
चुभती हैं क्यों दिल में
पता नहीं

बड़ी अजीब होती है
ये जीवन की राह
कब खुशी कब गम
पता नहीं.


(जो मेरे मन ने कहा.....)

6 comments:

  1. kya bat sachhai se likhi gayi rachna badhai

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  2. कभी ख़ुशी, कभी गम !...ये ही तो लाती है विविधता हमारे जीवन में।

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  3. आदरणीय सुनील जी,प्रिय माधव बहुत बहुत धन्यवाद.
    दीदी आप सही कह रही हैं कभी खुशी कभी गम जीवन की विविधता है.जिन से चाह कर भी हमारा पीछा नहीं छूट सकता.

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  4. यशवंत जी यही जिंदगी है...कभी खुशी और कभी ग़म और कभी खुशी के साथ ग़म
    आप तो लिखते ही अच्छा हैं

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