प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

03 June 2012

गोरख धंधा

सोच रहा हूँ शुरू करूँ
आज से मैं भी गोरख धंधा
चार आँखें हों चढ़ी नाक पे
बोलूँ फिर भी खुद को अंधा

कैसा होगा ऐसा धंधा
जिसमें पैसा -रुपया होगा
अकल घुलेगी घुटी भांग संग
बाप बड़ा न भैया होगा

ऐसा धंधा चोखा होगा
जिसमे केवल धोखा होगा
एक भरेगा अपना झोला
लुट पिट रोना दूजा होगा

चार अक्षर चालीस छपेंगे
घट बढ़ गड़बड़ मोल भरेंगे
इस धंधे की माया ऐसी
मोल तोल मे झोल करेंगे

माफ करो मुझ से नहीं होगा
कैसे मन ने सोचा ऐसा
रूख सूख का गरूर है खुद को 
नहीं चाहिये खोटा पैसा

गोरख धंधा,गोरख धंधा
अरबों का है मूरख धंधा
आज ऊंच कल नीच पड़ेगा
मंदा होगा जब ये धंधा 

तब मत कहना मुझ को अंधा।

©यशवन्त माथुर©

28 comments:

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

  1. लाजवाब रचना,बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...


    Rajpurohit Samaj!
    पर पधारेँ।

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,,,,,,

    RECENT POST .... काव्यान्जलि ...: अकेलापन,,,,,

    ReplyDelete
  3. bahut khoob likha hai aapne sach hai hridya ki uh-poh kuchh bhi kahe apne ko burai mein dhaalna asaan nahi.
    shubhkamnayen

    ReplyDelete
  4. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

    ReplyDelete
  5. superb....

    सोच रहा हूँ शुरू करूँ
    आज से मैं भी गोरख धंधा
    चार आँखें हों चढ़ी नाक पे
    बोलूँ फिर भी खुद को अंधा

    ज़रूरत नहीं सोचने की....
    यशवंत...अब तो शुरू हो जाएँ...!

    ReplyDelete
  6. माफ करो मुझ से नहीं होगा
    कैसे मन ने सोचा ऐसा
    रूख सूख का गरूर है खुद को
    नहीं चाहिये खोटा पैसा

    ....बहुत सच कहा है....संतुष्टी सबसे बड़ा धन है...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  7. नहीं भाई ,ऐसा मत करना | खूब लिखा है यशवंत तुमने |

    ReplyDelete
  8. सच कहा येसे धंधे से न तो बरकत होती है न ही मन को सकून मिलता है...बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  10. बेहतरीन...इसे ही संस्कार कहते हैं...गोरखधंधा करना सम्भव नहीं|

    ReplyDelete
  11. शुरू की पंक्तियाँ पढ़ कर लग रहा था ये आप किधर चल दिये ,बाद में -
    'माफ करो मुझ से नहीं होगा
    कैसे मन ने सोचा ऐसा'
    - ने बता दिया आप बिलकुल ठीक-ठाक हैं .
    कुशल बनी रहे !

    ReplyDelete
  12. *चार अक्षर चालीस छपेंगे
    घट बढ़ गड़बड़ मोल भरेंगे
    इस धंधे की माया ऐसी
    मोल तोल मे झोल करेंगे*
    पढ़ कर कुछ सोच में ही थी कि

    *गोरख धंधा,गोरख धंधा
    अरबों का है मूरख धंधा
    आज ऊंच कल नीच पड़ेगा
    मंदा होगा जब ये धंधा*

    संतोष हुआ .... !! समय के साथ नहीं बदलना ..... !!

    ReplyDelete
  13. उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

    ReplyDelete
  14. अरे नहीं बाबा....
    दूर ही रहने में भलाई है गोरख धंधों से...

    सस्नेह

    ReplyDelete
  15. सच में-तुमसे नहीं हो पायेगा......सबके बस की बात नहीं यह गोरख धंधा...

    ReplyDelete
  16. बहुत बढ़िया.......सटीक, सार्थक और सामयिक पोस्ट........

    ReplyDelete
  17. बहुत बढ़िया.......सटीक, सार्थक और सामयिक पोस्ट........

    ReplyDelete
  18. वाह ... बेहतरीन ।

    ReplyDelete
  19. समयानुकूल प्रस्तुति...!

    ReplyDelete
  20. वाह रे गोरख धंदा ।

    ReplyDelete
  21. .......प्रभावशाली प्रस्तुति

    ReplyDelete
  22. बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

    ReplyDelete
  23. बहुत ही सशक्त और प्रभावशाली रचना है....
    बुरे काम का बुरा नतीजा होता है
    देर से ही सही फल तो भुगतना ही है....

    ReplyDelete
  24. जो गलत है वो गलत ही रहेगा.....भले ही वो क्षणिक लाभ प्रदान करता हो परन्तु दीर्घकालिक सन्तुष्टि नहीं प्रदान कर सकता
    सुन्दर रचना यशवन्त भैया

    ReplyDelete
  25. यशवंत जी , ये गोरखधंधा आप जैसे सीधे सरल लोगों के लिए नहीं है ..... बढ़िया पोस्ट!

    ReplyDelete
  26. शानदार भावों से सजी पोस्ट।

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!