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06 June 2012

आम आदमी हूँ मैं

अभी 2 दिन पहले यशोदा दीदी ने फेसबुक पर एक स्टेटस दिया था। उसी स्टेटस से प्रेरित कुछ पंक्तियाँ-


न महलों मे रहता
न कारों मे चलता
न जहाजों मे उड़ कर
कहीं जाता हूँ मैं

न नेता न अभिनेता
न वादों से मुकरता
जो कहता
वो रोज़ निभाता हूँ मैं

अखबार मे रोज़ छपता
टूट टूट कर बिखरता
मुसीबतों मे जीने की
अजब कहानी हूँ मैं 

जो गर्मी मे झुलसता
शीत मे ठिठुरता
रोज़ भूख से बिलखता
आम आदमी हूँ मैं

©यशवन्त माथुर©

18 comments:

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  1. न नेता न अभिनेता
    न वादों से मुकरता
    जो कहता
    वो रोज़ निभाता हूँ मैं

    मन मोहक सुंदर प्रस्तुति ,,,,,

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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  2. टूट कर बिखरना नहीं जुड़ना.... जुड़जुड़ कर आगे बढ़ना है....एक आम आदमी की यही पहचान है.......बहुत सुन्दर भाव..सस्नेह

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  3. जो गर्मी मे झुलसता
    शीत मे ठिठुरता
    रोज़ भूख से बिलखता
    आम आदमी हूँ मैं
    भावमय करते शब्‍द ... बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  4. मुसीबतों मे जीने की
    अजब कहानी हूँ मैं
    gahan aur bahut sundar jazbaat ...
    badi khoobsoorti se vyakt kiye ....!!

    shubhkamnayen ...

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  5. रोज़ भूख से बिलखता
    आम आदमी हूँ मैं ....
    101 टका सही ....

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  6. सुन्दर भाई
    सोच की एक बूंद और मिली
    साधुवाद

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  7. जो गर्मी मे झुलसता
    शीत मे ठिठुरता
    रोज़ भूख से बिलखता
    आम आदमी हूँ मैं.....bilkul sateek abhivaykti aam admi ki......
    behtreen....

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  8. आम आदमी की मजबूती कों लिखा है यशवंत जी ... सच लिखा है ..

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  9. महल मिलें......करों में घूमो...
    मुसीबतों से दूर रहो...
    ना टूटो ना बिखरो...
    सर्दी में रहो गर्म,....

    आम से खास बन जाओ.................
    :-)
    सस्नेह....

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    Replies
    1. दीदी ! देश के हर आम आदमी को आपकी दुआ लगे !
      आमीन !

      सादर

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  10. क्या कहने....
    बहुत ही मार्मिक रचना...उत्कृष्ट

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  11. मार्मिक , कटु सत्य लिए पंक्तियाँ

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  12. आम आदमी का सत्य, भावपूर्ण रचना, बधाई.

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  13. जो कहता
    वो रोज़ निभाता हूँ मैं
    अखबार मे रोज़ छपता
    दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की करते रहिये .... !!

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  14. हर आम आदमी की यही कहानी है ....सुन्दर।

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  15. बेहतरीन प्रस्तुती ....
    Aam aadmi ka dard....

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