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12 February 2013

नज़र जब देखती है.....

नज़र -
जब देखती है
आसमान में उमड़ते
काले बादल 
नज़र -
जब देखती है
कड़कती बिजली
और झमाझम बारिश
नज़र -
जब देखती है
बारिश के बाद का
सुनहरा -ताज़ा सा
और कुछ मैला- काला सा
चित्र 
शायद तभी एहसास होता है
वर्तमान-भविष्य और भूत के
आपस में गुंथे होने का!

©यशवन्त माथुर©

9 comments:

  1. हमारा भुत,वर्तमान और भविष्य एक दूसरे से जुड़े हैं एक दूसरे की परछाई हमेशा हमारे सामने होती है,बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.

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  2. वर्तमान भविष्य और भूत.......
    यही तो जीवन है..
    सुन्दर भाव.

    सस्नेह
    अनु

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  3. खूबसूरत अभिव्यक्ति यशवंत भाई.

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  4. वाह ..गहरी नजर !

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  5. bhavpurna.. Sundar Pnktiya..
    http://ehsaasmere.blogspot.in/2013/02/blog-post_11.html

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (13-02-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  7. काल की निरंतरता की सुंदर अनुभूति !

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  8. ... खूबसूरत रचना यशवंत भाई
    शब्दों की मुस्कुराहट पर आने वाले दिनों में

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