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13 April 2013

बेटों की चाह में कहीं खो रही हैं बेटियाँ.........

प्रस्तुत हैं कन्या भ्रूण हत्या पर कुछ पंक्तियाँ- 


बेटों की चाह में कहीं खो रही हैं बेटियाँ।
बदलाव के इस दौर में भी मर रही हैं बेटियाँ॥  

खुदा की नेमतों का क्यूँ कत्ल करती रूढ़ियाँ। 
भले ही चढ़ रहे हों आज तरक्कियों की सीढ़ियाँ॥ 

गर्भ के भीतर है क्या क्यूँ जानने की लालसा। 
क्यों जनक भी जननी को ही मारने की ठानता॥ 

*राजा  की चाह में जब खो चुकेंगी रानियाँ। 
इंसान भी बन जाएगा तब बीत चुकी कहानियाँ॥ 

बेटों की चाह में कहीं खो रही हैं बेटियाँ ।
दे रही हैं ठौर और हाथ थाम रहीं बेटियाँ ॥  

~यशवन्त माथुर©

*[राजा बेटा ,रानी बेटी के अर्थ में ] 

16 comments:

  1. मर्मस्पर्शी ....बेटियों बिना संसार सूना है

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  2. बहुत ही बढ़िया रचना बेटिओं के नाम
    ''नवरात्र ''भाग 1

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  3. ज्वलंत समस्या पर सार्थक प्रस्तुति

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  4. *राजा की चाह में जब खो चुकेंगी रानियाँ।
    इंसान भी बन जाएगा तब बीत चुकी कहानियाँ
    समझ कर भी नासमझ बन करते जा रहे नादानियाँ
    मुझे तो हर पल अफसोस होता है कि बेटी एक होती
    सार्थक अभिव्यक्ति !!
    शुभकामनायें !!

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  5. सामयिक प्रस्तुति

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  6. बहुत अच्छी और सार्थक रचना...
    सस्नेह
    अनु

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  7. लोग क्यूँ नहीं समझते कि
    जब न होंगी बेटियां ..तो कहाँ से आयेंगे बेटे ...

    पधारें "आँसुओं के मोती"

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  8. लोग क्यूँ नहीं समझते कि
    जब न होंगी बेटियां ..तो कहाँ से आयेंगे बेटे ...

    पधारें "आँसुओं के मोती"

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  9. बहुत ही सार्थक रचना...

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  10. कन्या भ्रूण हत्या एक जघन्य कुकृत्य है- ऐसे दुष्ट-पापियों को चैन की मृत्यु न मिले।

    अच्छी पंक्तियाँ और सार्थक सन्देश।

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  11. बहुत सही चिंतन

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  12. बहुत सही चिंतन

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  13. Kitna kuch karte he hum ki kisi taraf samaj ki ye burai dur ho jaye...par ab bhi kuch log betiyo ko shrap samajhte he... aur is baat se anjaan h ki wo shrap nahi insan ki zindagi me wardan he....

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  14. समाज का सच है आज ये जो आपने कहा, शुभकामनाये,
    यहाँ भी पधारे,

    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/04/blog-post_5919.html

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  15. wah bhai mathur ji bahut khoob likha hai apne ....badhai .

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