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09 April 2013

खुद को खुदा समझ कर, जो......

खुद को खुदा समझ कर, जो आसमान में उड़ते हैं। 
जिस तेज़ी से उठते  हैं, उस तेज़ी से ही गिरते हैं। 

हम तो ज़मीं पर थे, हैं और रहेंगे।  
जुबानी सरहदों के भीतर, कुछ यूं ही कहेंगे ।

यूं तो रोज़ ही हम, गरज बादलों की सुनते हैं।
जो ऐसे ही गरजते हैं,वो शायद ही बरसते हैं।

खुद को खुदा समझ कर, जो आसमान में उड़ते हैं। 
उलझनों में फँसते हैं, कभी बाहर न निकलते हैं।


~यशवन्त माथुर©

5 comments:

  1. खुद को महान समझने वालों जैसा कोई बड़ा मुर्ख नहीं है,अहम मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है,बेहतरीन संदेश.

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  2. सत्य वचन
    शुभकामनायें !!

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  3. खुद को खुदा समझ कर, जो आसमान में उड़ते हैं।
    जिस तेज़ी से उठते हैं, उस तेज़ी से ही गिरते हैं।-bahut khub
    LATEST POSTसपना और तुम

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  4. खुद को खुदा समझ कर, जो आसमान में उड़ते हैं।
    जिस तेज़ी से उठते हैं, उस तेज़ी से ही गिरते हैं।
    ...इस में तो कोई शक़ नहीं

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