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24 April 2013

मैं कछुआ भी तो नहीं

भागते समय को
पकड़ने की
जद्दोजहद में
अक्सर याद करता हूँ
कछुआ
और खरगोश की कहानी 
और खुद पर
अफसोस 
कि मैं
कछुआ भी तो नहीं।

~यशवन्त माथुर©

6 comments:

  1. Priti Dabral
    bahut achhi rachna, sach hai ham na kachhua rahe na khargosh...kaisa hoga ye jeevan safar..

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  2. Bhavana Lalwani
    aapko ban naa hai toh abhi bulaate hain harry potter ko wo apni magic vend ghumaa k banaa dega aapko kachhuaa ya jo bhi aapko pasand ho :P

    ReplyDelete
  3. jyoti khare
    अपने भीतर पनपती अपनी ही बात
    बहुत बढ़िया

    ReplyDelete
  4. सोचने को विवश कर दिया....

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