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08 April 2013

इस दुनिया में कभी कभी

इस दुनिया में कभी कभी
कुछ उल्टा पुल्टा होता है
कोई जागता सारी रात भर
कोई दिन भर सोता है

किसी किसी की जेब से पैसा
बाहर निकल बिखरता है
किसी किसी के हाथ से पैसा
कोई तीसरा छीन लेता है

एक तरफ कंगाली
इंसान आदम खोर हो जाता है
एक तरफ कोई खाते खाते
यूं ही बोर हो जाता है
 
किस्मत को कोई दोष न देना
सब फेर समझ का होता है
खुश रहता फुटपाथों पर
कोई महलों में भी रोता है

इस दुनिया में कभी कभी
कुछ उल्टा पुल्टा होता है
गूंगा यूं तो 'यशवन्त माथुर'
अपने ब्लॉग पर बोलता है।

 ~यशवन्त माथुर©

~

14 comments:

  1. ये भी सही है...बढ़िया पंक्तियाँ

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  2. आज के दौर में सब कुछ तो उल्टा-पुल्टा हो ही रहा है,अमीर ज्याद अमीर होते जा रहें है गरीब ज्याद ही गरीब,बेहतरीन प्रस्तुति.

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  3. यूँ ही खरा-खरा बोलते रहिये......

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  4. कभी कभी होता तो चल भी जाता यहाँ तो हर पल ही कुछ न कुछ उल्टा-पुल्टा होता है..यशवंत जी..

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  5. बहुत सुंदर रचना सही कहा आपने

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  6. ये सब कभी कभी नहीं अक्सर होता है ...बढ़िया रचना

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  7. सुन्दर प्रस्तुति -
    आभार आदरणीय-

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  8. वाह वाह.. मज़ा आ गया..
    गहरी बात, सरल संवाद!

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  9. सही कहा..सुन्दर प्रस्तुति -

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  10. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 10/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  11. बहुत सुंदर और मौजू रचना.. बधाई ..

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  12. बहुत सुंदर और मौजू रचना.. बधाई ..

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