प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

06 March 2011

खुल गया है राज़

जिन परछाईयों से
मैं बातें किया करता था 
अक्सर
और चला करता था
हँसते हुए
आज
उन परछाईयों का
राज़ खुल गया है
और मैं पछता रहा हूँ
आखिर
ये दोस्ती ही
क्यों की?


9 comments:

  1. अच्‍छी रचना।
    बुरे वक्‍त में परछाई भी धोखा दे देती है और फिर पछतावा ही रह जाता है।
    अच्‍छे भाव।

    ReplyDelete
  2. वक्त के साथ बदलती परछाई ..... सुंदर

    ReplyDelete
  3. कभी-कभी ये परछाइयां ही बहुत बडा सच लगती हैं ।
    खूबसूरत भावनाओं की प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति । शुभकामनायें ।

    ReplyDelete
  4. बहुत बढ़िया!!!

    ReplyDelete
  5. अंधेरों में तो परछाई भी साथ नहीं देती ... ये बात बिलकुल सही है ..

    ReplyDelete
  6. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!