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12 March 2011

ये लहरें

ये लहरें
कभी समुद्र में
सुनामी बनकर उमडती हैं
कभी मन में
विचार बनकर
रख देती हैं नींव
विध्वंस और
नव निर्माण की.

24 comments:

  1. bahar dikhta hai, andar ... ?
    kuch shabdon ne andar ki sunami ko darsha diya

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  2. मन की सुनामी भी कम खतरनाक नहीं

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  3. हम्म... प्रकृति को सुनामियों/ भूकंपो की प्रेरणा अमरीका से मिलती है...

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  4. ...पहले गिराओ फिर बनाओ, नोट कमाओ

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  5. होली की अपार शुभ कामनाएं...बहुत ही सुन्दर ब्लॉग है आपका....मनभावन रंगों से सजा...

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  6. सच कहा यशवंत जी…………बेहद विनाशकारी होती हैं ऐसी लहरें फिर चाहे वो नवनिर्माण का आधार ही क्यो ना रख रही हों मगर है तो विध्वंसक ही।

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  7. bouth he aacha post hai aapka... aapne aapne is poem se kafi kuch bataa diya hai logo ko... thx have a good day
    Visit my blog....
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    Lyrics Mantra

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  8. बहुत सच कहा है ..बहुत विध्वंशकारी होती हैं ये लहरें, चाहे सागर की हों या मन की..

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  9. छोटी सी पर बहुत सुन्दर कविता...बधाई.
    __________________
    पाखी के मामा जी को मिला बेस्ट जिला कलेक्टर का अवार्ड.

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  10. Yashwant ji bahut sahi kaha hai aapne ...

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  11. सही बात कही है आपने..अच्छी अभिव्यक्ति...

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  12. aapne bilkul sahi kaha ab dekho n japan ki dukhad ghatna .
    bilkul sahi baat

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  13. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

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  14. रख देती हैं नींव
    विध्वंस और
    नव निर्माण की.
    wah. kitna sundar likha hai.

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  15. ये लहरें
    कभी समुद्र में
    सुनामी बनकर उमडती हैं
    कभी मन में
    विचार बनकर
    रख देती हैं नींव
    विध्वंस और
    नव निर्माण की.

    बहुत संवेदनशील ....
    मार्मिक भावों की प्रभावी अभिव्यक्ति .......

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  16. सही बात कही है आपने..अच्छी अभिव्यक्ति.

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  17. रचना छोटी सी है ... पर बात बहुत बड़ी .... बहुत खूब ...

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  18. गागर में सागर सी समाई ये ये लहरे तो आपकी रचना में ...!!
    --------------
    क्या नाम दें?

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  19. बहुत खूब ...
    खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

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  20. apki har rachna ki ek khas baat hai bhut kam sabdo me bhut kuch kah dena.. bhut hi acche se aap kar lete hai...

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