प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

14 March 2011

क्षणिका

गमले में खिला
गुलाब
मुझे देख कर
मुस्कुरा रहा है
और मैं
जल रहा हूँ
चिढ रहा हूँ
काँटों के बीच
उसकी
जीवटता देख कर .

15 comments:

  1. जलिये मत ………सीखिये उससे जीना इसी को कहते हैं।

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर..कठिनाइयों के बीच भी जो मुस्कराता रहे वही तो असली जीना है.

    ReplyDelete
  3. जिसमें भी जीने की उत्कट लालसा होगी वही ऐसा जीवन जी सकता है ।जीवन का मूल मंत्र पाने के लिये बधाई ..

    ReplyDelete
  4. बहुत ही कोमल और कठिन शबदो में लिखा पोस्ट ... आपका दिन अच्छा रहे
    प्रणाम,
    मेरा ब्लॉग विसीट करे !
    Music Bol
    Lyrics Mantra
    Shayari Dil Se

    ReplyDelete
  5. jaliye mat baraabari kariye...

    ReplyDelete
  6. Vandna ji ne sahi kaha hai -gulab se jeevan jeene ki kala sikhiye .

    ReplyDelete
  7. वो जिविट रहने का संदेश दे रहा है ... सिखा रहा है काँटों के बीच भी ....

    ReplyDelete
  8. एक संदेश है गुलाब का कांटों के बीच यूं होना ...।

    ReplyDelete
  9. बहुत खूब... सुंदर सकारात्मक क्षणिका

    ReplyDelete
  10. वाह !! क्या बात कही हिया ... बहुत खूब .

    ReplyDelete
  11. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!